
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। शराब नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को विशेष अदालत ने सोमवार को चार मार्च तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने सिसोदिया को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। उधर, गिरफ्तारी के बाद दिल्ली समेत पूरे देश में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
सीबीआई ने बीते रविवार को करीब आठ घंटे की पूछताछ के बाद सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया था। सोमवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, सिसोदिया से ऐसी जगह पूछताछ हो, जहां सीसीटीवी लगे हों और फुटेज सुरक्षित रखी जाए। कोर्ट ने यह आदेश सिसोदिया की उस आशंका के मद्देनजर दिया, जिसमें उनसे थर्ड डिग्री या जबरदस्ती की आशंका जताई गई थी।
हर 48 घंटे में चिकित्सा जांच कोर्ट ने सीबीआई को हर 48 घंटे में एक बार सिसोदिया की चिकित्सा जांच का भी आदेश दिया। इसके अलावा सिसोदिया को हिरासत अवधि के दौरान प्रतिदिन अपने वकीलों से आधे घंटे और पत्नी से 15 मिनट मुलाकात करने की अनुमति दी।
कार्यकर्ता-पुलिसकर्मी भिड़े सिसोदिया को कोर्ट में पेश करने से पहले आम आदमी पार्टी ने जमकर प्रदर्शन किया। भाजपा मुख्यालय के पास सख्त सुरक्षा पहरे के बावजूद उस ओर बढ़ रहे आप नेताओं को रोके जाने पर उनकी पुलिस के साथ झड़प और धक्का-मुक्की हो गई। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान दो सौ से अधिक लोग हिरासत में लिए गए। पुलिस कार्रवाई के बाद भी जब आप कार्यकर्ता नहीं हटे तो पुलिसकर्मी पार्टी मुख्यालय के भीतर घुस गए। इससे नाराज आप नेताओं और पुलिस में झड़प हो गई। इस दौरान दोनों ओर से धक्का-मुक्की होती रही। आप नेता पार्टी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक समेत कई राज्यों में आप कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।
बचाव पक्ष की दलील
● गिरफ्तारी गैर कानूनी है। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया ●
● वकील ने कहा, सीबीआई का आरोप है कि सिसोदिया ने मोबाइल फोन बदले थे, ऐसा करना कोई अपराध नहीं है
● नई शराब नीति का क्रियान्वयन एलजी की मंजूरी के बाद किया गया। साजिश की गुंजाइश नहीं
इसलिए भेजा रिमांड पर
विशेष अदालत ने कहा, तथ्यों से जाहिर है कि सिसोदिया दो बार पूछताछ में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए। कोर्ट ने कहा, सिसोदिया के अधीन काम करने वाले लोग ऐसे तथ्य सामने लाए जो उनके (सिसोदिया) खिलाफ जाते हैं।
